Bettiah: बिहार के बेतिया में मानवता को एक बार फिर शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां दरिंदों ने एक दस वर्षीय नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म कर हत्या का प्रयास किया है. घटना कालीबाग ओपी अंतर्गत एक मोहल्ले की है जहां दस वर्षीय मासूम बच्ची दवा खरीदने गई थी. वहां दो युवकों ने उसका अपहरण कर लिया और मुंह मे रुमाल ठूंसकर उसके साथ दुष्कर्म किया. यही नहीं दुष्कर्म के बाद दोनों ने मासूम की गला रेत हत्या कर झिलिया में फेंक दिया, लेकिन मासूम जिंदा थी.

कुछ लोगों ने देखा तो उसे बाहर निकाला. मासूम को स्थानीय लोगों ने उसके घर पहुचाया जहां मासूम ने अपने साथ घटित घटना को घरवालों को बताई. बच्ची दोनों युवकों में से एक को पहचानती थी जिसका नाम राजदेव है और दूसरे को नहीं पहचान पाई. परिजनों ने आनन-फानन में मासूम को बेतिया गवर्मेंट मेडिकल कालेज पहुंचाया जहां पीड़िता मासूम का इलाज चल रहा है. मासूम बच्ची के गले पर गहरे जख्म के निशान है.

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सूचना पर कालीबाग ओपी प्रभारी मनीष कुमार पहुच मासूम के बयान पर प्रथमिकी दर्ज की और त्वरित कार्यवाही करते हुए एक नामजद राजदेव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

वहीं, पीड़िता के पिता ने बताया कि शनिवार की शाम उसकी पुत्री दवा खरीदने घर से निकली थी. काफी देर बीत जाने के बाद भी नहीं लौटी तो खोज भी शुरू की गई. इसी बीच मोहल्ले के वार्ड पार्षद ने पुत्री के गला पर चाकू से प्रहार होने की सूचना दी. जबकि पीड़िता ने बताया कि दवा खरीद कर लौटते समय वह एक ठेला दुकानदार से भांजा खरीद रही थी.

इसी बीच राजदेव कुमार अपने दोस्त के साथ आया और उसे पकड़ लिया. मुंह में रुमाल ठूस और आंख बांध दोनों एक अनजान जगह पर ले गए. उसकी पिटाई करने लगे. कपड़े खोल गलत काम करने लगे, उसके बाद से मुझे कुछ याद नही है.

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वही, इस मामले में बेतिया एसपी उपेन्द्रनाथ वर्मा ने बताया कि ये घटना शनिवार की रात की है. कल मामले में पुलिस ने एक को गिरफ्तार कर लिया है. मासूम के बताए गए जगह से उसके कपड़े बरामद किए गए हैं और जिस ब्लेड से गर्दन पर वार किया गया था वह भी बरामद किया गया है. मासूम के साथ दरिंदों ने गलत किया है, उसका साक्ष्य भी बरामद किया गया है. मामले में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी.

अब सवाल उठता है कि आखिर कहां सुरक्षित हैं. बेटियां अब मासूमों को दरिंदे अपने हवस का शिकार बना रहे हैं. बच्चियां अपनी इज्जत बचाने के लिए चीख रही हैं और दरिंदे हदों को पार कर रहे हैं. आखिर कब तक चिखती और चिल्लाती रहेंगी बेटियां ये सत्ता से बड़ा सवाल है.
इनपुट:- धन्नंजय





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