लखनऊ: फरवरी का महीना अब अपने अंतिम दिन गिन रहा है. इसके साथ ही धीरे-धीरे सर्दी का मौसम भी खत्म हो रहा है. मार्च- अप्रैल से किसान गेंहू की फसल (Wheat Crop) काटने में जुट जाएंगे. कई ऐसे किसान हैं, जो गेंहू की फसल काटने के लिए हार्वेस्टर (Harvester) की मदद लेते हैं. ऐसे में भूसा भी कम मिलता है और पराली भी बच जाती है. लेकिन अगर आप अपने गेहूं की नरई (डंठल) का सही तरीके से इस्तेमाल करते हैं, तो एक अच्छी खासी इनकम कमा सकते हैं. आइए जानते हैं कैसे…

स्ट्रा बढ़ाएगी इनकम
दरअसल, देश में सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगा दिया गया है. ऐसे में प्लास्टिक की स्ट्रा के इस्तेमाल में भारी कमी आ गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्लास्टिक स्ट्रा की जगह गेंहू की नरई से बनी स्ट्रा का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसकी मांग दिल्ली, मुंबई व दक्षिण भारत के बंगलुरु जैसे शहरों में तेजी के साथ बढ़ी है.

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भूसे से मिलेगी दोगुनी कीमत
किसानों के लिए गेंहू के पराली से इनकम का एक ही पारंपरिक जरिया है.  किसान भूसे को बेचते हैं, जिसका यूज पशु चारे के तौर पर किया जाता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भूसे की कीमत चार-पांच सौ रुपये क्विंटल होती है. वहीं, बताया जा रहा है कि नरई से स्ट्रा बनाने के लिए इसकी कीमत 1000 रुपये तक हो सकती है. हालांकि, अभी तक मार्केट में इसका दाम तय नहीं है. यह बढ़ या घट भी सकता है.

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सरकार भी खरदती है पराली
नरई बेचने के अलावा किसानों के पास एक और विकल्प है कि वो अपनी पराली सरकार को बेच दें. दरअसल, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पराली से बायो कोल बनाने का संयंत्र लगाया है, जिसके लिए पराली की कीमत भी तय की गई है. यहां पर भी पराली बेचने पर 1500 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक की आय हो सकती है.

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