पटना: बिहार में स्वास्थ्य की हालत सुधारने के लिए राज्य सरकार ने कई योजनाओं की आज शुरुआत की तो कुछ योजनाओं के लिए समझौता भी हुआ है. योजनाओं की शुरुआत के बाद नीतीश कुमार (Nitish Kumar)  ने दावा किया कि पिछले सोलह सालों में स्वास्थ्य की सेहत में गुणात्मक सुधार हुआ है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने स्वास्थ्य सुविधाओं को विस्तार देते हुए कई योजनाओं की शुरुआत की. इन योजनाओं के शुरू होने से बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं में बुनियादी फर्क को लोग महसूस करने लगेंगे. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, डिप्टी सीएम रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद ने दावा किया है कि,सेहत के मामले में बिहार अगले कुछ सालों में अग्रिम पंक्ति में खड़ा होगा.

डिप्टी CM रेणु देवी (Renu Devi) ने कहा कि जिस तरह की योजनाओं और सेवा का आज लोकार्पण हुआ है उससे यकीन मानिए बिहार के लोगों को सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी. हमारी सरकार स्वास्थ्य के मामले में पूरी तरह ईमानदार है और लोग भी ऐसा ही महसूस करते हैं.

वही, उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद (Tar Kishore Prasad) ने कहा कि क्या स्थिति हुआ करती थी डेढ़ दशक पहले और आज कैसी स्थिति है. हमारी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति ईमानदार कोशिश की है और उसी का परिणाम है कि हम बिहार के बेहतर स्थिति में पाते हैं.

स्वास्थ्य हो या कोई और दूसरी सेवा हमने हर क्षेत्र में बेहतर काम किया है. कुछ सालों में बिहार स्वास्थ्य मामले में अग्रिम पंक्ति में खड़ा मिलेगा.

दरअसल, बिहार सरकार की सात निश्चय पार्ट-2 (Saat Nishchay Part-2) योजना में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर जोर है. इसी सिलसिले में आज कई योजनाओं का उद्घाटन हुआ. आइए जानते हैं कि आज कौन-कौन सी परियोजनाओं की शुरुआत हुई और उससे क्या फायदे होने वाले हैं.

। 102 इमरजेंसी बिहार ’एपीपी
इस ऐप को आम लोग गुगल प्ले स्टोर से अपने मोबाइल में डाउनलोड कर सकते हैं. इस ऐप में रोगी या इसके तिमारदार को एंबुलेस सुविधा का लाभ उठाने के लिए रजिस्टर कराना होगा. इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत ये होगी कि, एंबुलेस कहां पहुंची, एंबुलेस (Ambulance) के ड्राइवर कौन हैं. कितनी देर में एंबुलेंस पहुंचेगी ये सभी जानकारी मिल सकेगी.

102 एम्बुलेंस पोर्टल
इस पोर्टल का उपयोग सरकार भविष्य में स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर बनाने के मकसद से करेगी.

‘दीदी की रसोई’ स्वास्थ्य विभाग बिहार और जीविका के बीच समझौता
दीदी की रसोई का मकसद बिहार के सभी जिला और अनुमंडल अस्पतालों में रियायती दरों पर शुद्ध और पौष्टिक भोजन की आपूर्ति मरीजों को करना है. रोजना भोजन की कीमत 150 रूपए होगी .हर साल भोजन की दर में 5 फीसदी का इजाफा हो सकता है.

अस्पताल के अंदर कैंटीन बनाई जाएगी और मरीजों को भोजन जीविका दीदी (Jeevika Didi) यानि कार्यकर्ता देंगी. फिलहाल बिहार के सात जिलों बक्सर, शिवहर, सहरसा, मानपुर(गया), शेखपरा, पूर्णिया और वैशाली के सदर अस्पताल में ये सुविधा उपलब्ध है.

टेलीमेडिसीन (Telimedicine)
स्वास्ख्य विभाग की योजना राज्य में मौजूद सभी 36 सदर अस्पतालों, दरभंगा और पश्चिम चंपारण में एक-एक अनुमंडलीय अस्पतालों और 158 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को डॉक्टर मरीजों को मेडिकल परामर्श देंगे. चिकित्सा पदाधिकारी डेस्कटॉप पर एएनएम (ANM) के सहयोग से मरीजों को सलाह देंगे. फिलहाल सप्ताह में तीन दिनों, सोमवार, गुरूवार और शनिवार को सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक ये सुविधा दी जाएगी.

अश्विन पोर्टल
आशा वर्कर्स परफॉर्मेंस एंड इंसेटिव पोर्टल (Asha Workers Performance and Incentive Portal) यानि अश्विन के जरिए आसान तरीके से आशा कार्यकर्ताओं के काम की एंट्री पोर्टल पर होगी. पूरे बिहार में 93 हजार 687 आशा कार्यकर्ताओं की बहाली होनी है. अब तक 87 हजार 461 आशा कार्यकर्ता बहाल हुई हैं. अब से इन आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी. आज से इसकी शुरुआत हुई.

वंडर कार्यक्रम
गर्भवती महिलाओं को बेहतर सुविधा, सेवा देने के मकसद से WONDER कार्यक्रम की शुरुआत होने जा रही है. महिलाओं की गर्भ ठहरने से लेकर डिलेवरी तक नियमित और जरूरी जांच इस वंडर पोर्टल के जरिए होगी. गर्भवती महिलाओं से जांच के दौरान मिली जानकारी इस पोर्टल पर सुरक्षित रहेगी और एक अलर्ट के जरिए महिलाओं की सुरक्षित डिलेवरी होगी.

दरभंगा में ये योजना सफल हुई है. पहले फेज में दरभंगा के अलावा पटना,नालंदा,गया,मुजफ्फरपुर और भागलपुर में वंडर पोर्टल को लॉन्च किया जाएगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दावा किया है कि पिछले छह सालों में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के साथ ही इसका विस्तार हुआ है.

साल 2005 में ये हालात थे कि कि 1 महीने में सिर्फ 40 लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जाते थे. अब एक महीने में औसतन 10 हजार लोग पीएचसी (PHC) जाते हैं. सारे पीएचसी को कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (Community Health Care center) के रूप में तब्दील किया जा रहा है. ये मानना पड़ेगा कि बिहार की प्रगति में जीविका का योगदान काफी अहम है.

बिहार सरकार ने आज जिन सुविधाओं की शुरुआत की है उसमें अहम दीदी की रसोई और 102 एमरजेंसी बिहार एप्प है. अगर इन सुविधाओं को ईमानदारी से लागू किया जाए तो संदेह नहीं कि बिहार के लोगों को बेहतर इलाज के लिए बाहर का रूख नहीं करना पड़ेगा.





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